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PostHeaderIcon बिगड़ता हुआ बच्चा

सीट न मिलने के कारण बस में वे तीनों अलग-अलग बैठ गए।
''क्या आप डाक्टर हैं?'' अपने बगल में बैठे व्यक्ति से बच्चे ने पूछा।
''नहीं!''
''आप जरूर बड़े आदमी होंगे, हैं ना!''
''नहीं, मैं बड़ा आदमी नहीं हूं।''
बच्चा सोच में पड़ गया और जोर-जोर से बाजा बजाने लगा।
''बेटे, हल्के से बजाओ!'' मां ने उसे टोका।
''आप बड़े आदमी क्यों नहीं हैं?''
''न तो मेरे पास खूब सारा पैसा है, न ही लोग मेरा नाम जानते हैं.. इसलिए..!''
''पापा, अंकल चिप्स लेना है!'' स्टेशन पर बस के रुकने पर वह बोला।
''बेटा, यहां अंकल चिप्स नहीं मिलता.. घर जाकर लेंगे!''
''आपने कहा था रास्ते में लेंगे। सामने वाली दुकान में है.. मुझे दिखाई दे रहा है!''
''बेटे वो लोकल चिप्स है!''
''नहीं, वो अंकल चिप्स है..।'' बच्चा
''तुम बहुत जिद करने लगे हो.. बिगड़ते जा रहे हो!''
''लेकिन इसमें बिगड़ने की क्या बात है.. आपने ही तो दिलाने को कहा था!''
''बेटे, बस छूट जाएगी!''
''कैसे छूटेगी.. ड्राइवर सीट पर नहीं है।''
हार कर कर मम्मी उसे बस से बाहर ले गयी। वह खुशी-खुशी अंकल चिप्स खाने लगा। बीच-बीच में बाजा भी बजा देता।
''पापा, इतना समय बीत गया। घर क्यों नहीं आ रहा है?'' इंतजार करते-करते हार कर उसने आध घंटे बाद पूछा।
''बस, बेटा आता ही होगा!''
''जिद्दी हो गया है.. बिगड़ने लगा है.. कितने सवाल करने लगा है?'' पति ने कहा और पत्नी ने सहमति में सिर हिलाया।


दिनेश कर्नाटक

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